ईश्वर ही बुरे और अच्छे वक्त के साथी है

godएक व्यक्ति जो भगवान  में बहुत विश्वास रखता था। वह श्री बांके बिहारी जी का सच्चा भक्त था। बड़े प्रेम से भगवान की सेवा किया करता था । एक दिन उसने भगवान से कहा कि मैं आपकी इतनी भक्ति करता हूं, पर आज तक मुझे एेसा एहसास नहीं हुआ कि आप हमेशा मेरे साथ है।आप भले ही मुझे दर्शन न दें पर कुछ एेसा करें कि मुझे ये एहसास हो कि आप मेरे साथ हमेशा है। भगवान ने कहा ठीक है, तुम रोज सुबह समुद्र के किनारे सैर पर जाते हो जब तुम रेत पर चलोगे तो तुम्हें दो पैरों की जगह चार पैर दिखाई देगें।
दो पैर तुम्हारे होंगे ,दो पैर मेरे होगे। इस तरह तुम्हें मेरी अनुभूति होगी।अगले दिन वह सैर पर गया, जब वह रेत पर चलने लगा तो उसे अपने पैरों के साथ दो पैरों के निशान दिखाई देने लगें , रोज एेसा होने लगा। वह भक्त बड़ा प्रसन्न हुआ।कुछ समय पश्चात् उसे व्यापार में नुक्सान होना शुरू हो गया ,उसका इतना नुक्सान हो गया कि वे सड़क पर आ गया।उसके रिश्तेदारों ने भी उसका साथ छोड़ दिया।वो सैर पर जरूर जाया करता था,उसने देखा कि अब उसे रेत पर सिर्फ दो पैरों के निशान ही दिखाई देने लगे।
उसने सोचा भगवान ने भी मुसीबत के वक्त उसका साथ छोड़ दिया। उसका व्यापार धीरे धीरे ठीक होने लगा,फिर सारे रिश्तेदार वापिस उसके पास आना शुरू हो गए।जब वह सैर करने के लिए गया तब रेत पर फिर उसे चार पैरों के निशान दिखाई देने शुरू हो गए। फिर उसने भगवान से पूछा जब मेरे बुरा वक्त चल रहा था, तब आप ने भी मेरा साथ छोड़ दिया था ।
जब सब कुछ ठीक हो गया तब आप भी मेरा साथ देने के लिए आ गए। फिर भगवान जी ने कहा तुम एेसा सोच भी कैसे सकते हो कि मैने तुम्हारा साथ छोड़ दिया था। जब तुम सैर करने जाते थे,तब तुम जो पैरों के निशान रेत पर देखते थे,वो मेरे पैरों के निशान थे । उस वक्त मैं तुम्हें अपनी गोंद में उठाकर चलता था।अब तुम्हारा बुरा वक्त खत्म हो गया ,तो मैने तुम्हें नीचे उतार दिया। इसीलिए तुम्हें रेत पर चार पैरों के निशान दिखाई दें रहे है।

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