पुस्तक मेले में दिखा मिनी भारत

PUSTAK विश्व पुस्तक मेला मिनी भारत के रूप में तब्दील हो गया है। हर  भाषा व भाषी की यहां मुराद पूरी हो रही है। हिंदी व अंग्रेजी के अलावा  उर्दू व अन्य भारतीय भाषाओं की साहित्यक कृतियों के कद्रदानों को  अनमोल जगह मिली हुई है। हॉल नंबर 10 में अपनी भाषा की  पुस्तक के लिए काफी संख्या में लोग आ रहे हैं। इसके अलावा हॉल  नंबर सात में पाकिस्तान का भी एक स्टॉल लगा है।

 मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी के मोइनुद्दीन सिद्दीकी कहते हैं कि उर्दू का  चलन कम हो रहा है, लेकिन आज भी मौलिक लेखन हो रहा है साथ  ही अनुवाद भी हो रहा है। उर्दू की ढेर सारी किताबें यहां मिल जाती है  जो आमतौर पर दिल्ली में उपलब्ध नहीं होती। खुदाबख्श लाइब्रेरी,  पटना के नईमुल्लाह खान कहते हैं कि वह शोध पर आधारित  पुस्तकें लेकर आए हैं। जो उर्दू के कद्रदानों को खूब पसंद आ रही हैं।  संस्कृत प्रेमियों को भी यहां नया आकाश मिल रहा है। पश्चिम  बंगाल  राज्य पुस्तक परिषद के गौतम डे बताते हैं कि मूल बांग्ला  पुस्तकों की बहुत बडी रेंज मेले में हैं। वह कहते हैं कि नई पीढी  बांग्ला नहीं जानती, उनके लिए हिंदी व अंग्रेजी से बांग्ला सीखने के लिए भी किताबें हैं।

दिल्ली निवासी सुकमल बरूआ कहते हैं कि चितरंजन पार्क में बांग्ला की कुछ पुस्तकें मिल जाती हैं, लेकिन यहां तो ढेर सारी पुस्तकें हैं। कन्नड और तेलगू की पुस्तकें लेकर आए पी. सोमाशेखर कहते हैं कि दिल्ली में इन पुस्तकों के खरीददार कम हैं, लेकिन पुस्तक प्रेमी यहां आ रहे हैं। अमृतसर से पंजाबी पुस्तक लेकर आए सुखजीत सिंह कहते हैं कि सिंह ब्रदर्स द्वारा न केवल मूल पंजाबी में पुस्तकें प्रकाशित की जाती हैं बल्कि हिंदी, अंग्रेजी के अलावा कई विदेशी भाषाओं में भी पुस्तकें प्रकाशित की जाती है। लोग यहां किताबें खरीदने खूब आ रहे हैं। गुजरात के कच्छ से आए भावेश बिहराणी बताते हैं कि दिल्ली में सिंधी साहित्य, कविता नाटक व गीत के काफी मुरीद हैं। पुस्तकों से ज्यादा सिंधी सीडी बिक रही है। इस वर्ष सिंधी, हिंदी, अंग्रेजी डिक्शनरी भी प्रकाशित की गई है। गुवाहटी से आए एके वर्मन कहते हैं कि वह असम के सभी पब्लिशर्स की पुस्तकों के साथ मेले में आए हैं। उत्तर पूर्व के छात्र-छात्राएं यहां काफी संख्या में आकर किताबें खरीद रहे हैं। मेले में कन्नड के तीन, मलयालम के 13, मणिपुरी का एक, मराठी का तीन, उडिया का एक, पंजाबी के आठ, संस्कृत के 19, संथाली का एक, सिंधी के दो, तमिल के नौ, तेलगू के तीन, उर्दू के 39 स्टॉल लगे हैं।

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