साहित्य

" पिता आज भी पैसे बचाते है "

” पिता आज भी पैसे बचाते है “ पुरानी पेंट रफू करा कर पहनते जाते है, Branded नई shirt देने पे आँखे दिखाते है| टूटे चश्मे से ही अख़बार पढने का लुत्फ़ उठाते है, Topaz के ब्लेड से दाढ़ी बनाते है, पिताजी आज भी पैसे बचाते है ….   कपड़े का पुराना थैला लिये दूर की मंडी तक जाते है, ... Read More »

OMG! महिलाओं में ऐसे भी बढ़ती है कामुकता

appale

कहावत है की एक सेब जो रोज है खाता डॉक्टर को वह दूर भगाता। इस कहावत की मानें तो प्रतिदिन एक सेब खाने से बीमारियों से बचा जा सकता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि सेब में ऐसे जादुई गुण हैं जिससे बीमारियां ही नहीं बल्कि सेक्‍स की अवधि में अपने साथी के साथ अधिक वक्त तक टिकने के लिए ... Read More »

तुलना एक मूर्खतापूर्ण वृत्ति है

COMPARISION

ईर्ष्या से इतनी पीड़ा क्यों होती है? ईर्ष्या तुलना है और हमें तुलना करना सिखाया गया है, हमने तुलना करना सीख लिया है और हमेशा तुलना करते हैं। किसी और के पास ज्यादा अच्छा मकान है, किसी और के पास ज्यादा सुंदर शरीर है, किसी और के पास अधिक पैसा है, किसी और के पास करिश्माई व्यक्तित्व है। जो भी ... Read More »

जानें कैसे पत्थर से निकले भगवान और उन्होंने भक्त के लिए किए कैसे-कैसे चमत्कार

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 धन्ना जाट के पिता एक साधुसेवी, सरल ह्रदय, साधारण किसान थे।  पढ़े लिखे ताे थे नहीं, पर थे श्रद्धालु। उनके यहां प्राय: विचरते हुए साधु-  सन्त आकर एक-दाे दिन टिक जाते थे। धन्ना जी की उस समय पांच  वर्ष की अवस्था थी। उनके घर एक ब्राह्मण पधारे। उन्हाेंनेे अपने हाथाें  कुएं से जल निकालकर स्नान किया आैर तब झाेली में ... Read More »

जिंदगी की कमाई

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 देश भर में अध्ययन यात्रा करके गांधी जी चरखा संयोजन के लिए 0  धन इकट्ठा कर रहे थे। जब गांधी जी सभा को संबोधित कर रहे थे  तब वही भीड़ में खड़ी एक महिला जिसके कपड़े फटे हुए थे और वे  इतनी बूढ़ी थी कि उसकी कमर भी झुक चुकी थी।उसने सब लोगों से  आग्रह किया कि वो गांधी जी ... Read More »

स्वयं विचार करें लोगों के सुझाव कहां तक मानने चाहिए

SALAH

 हमारे आस-पास टीका-टिप्पणी करने वाले लोग भरे पड़े रहते हैं। दूसरों के किए-कराए  पर टिप्पणी करना ही उनका काम होता है। मगर हमें व्यावहारिक रूप से चतुर होना  चाहिए। हमारे रोजमर्रा के जीवन में कभी न कभी हमें टीका-टिप्पणी करने वाले लोगों  का सामना करना ही पड़ता है। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि उनकी टीका-टिप्पणी  से बिना लडख़ड़ाए ... Read More »

स्वयं विचार करें कहां तक सार्थक है पति के वियोग में ऐसा जीवन बिताना

savitrio

गृहस्थी में पुरुष के कार्यों में स्त्री की भी अहमियत होती है। जो पुरूष कोई भी धार्मिक कृत्य अपनी पत्नी के बीना अकेला करता है। उसका वह कृत्य सफल नहीं होता। काशीपुर में एक सदुगुणी वैश्य रहते थे। उनका नाम था कृकल। उनकी पत्नी सकुला परम साध्वी तथा उत्तम व्रत का पालन करने वाली थी। एक दिन कृकल ने अपनी ... Read More »

मुख्यमंत्री आनंदी बेन को धार्मिक पुस्तकों से तौला गया

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सूरत: धार्मिक पुस्तकों का किसी भी धर्म में एक महत्वपूर्ण स्थान होता है और कोई भी धर्म अपनी धार्मिक पुस्तकों का अपमान सहन नहीं कर सकता है। लेकिन कहने वाले कहते हैं कि राजनीति में सब कुछ जायज है और शायद इसीलिए नेताओं को धार्मिक पुस्तकों से भी तौल दिया जाता है। ऐसा ही एक वाकया गुजरात के सूरत में नजर ... Read More »

खलीफा उमर और फरिश्ता

god

खलीफा उमर ने एक बार एक फरिश्ते को कंधे पर मोटी सी पुस्तक उठा कर ले जाते हुए देखा। फरिश्ते से पूछने पर पता चला कि पुस्तक में खुदा की इबादत करने वालों के नाम हैं। खलीफा ने फरिश्ते से पुस्तक मांग कर उसके पन्ने पलटे तो उन्हें अपना नाम कहीं दिखाई नहीं दिया। खलीफा ने सोचा कि ‘हो सकता ... Read More »

चाणक्य नीति

CHANAKYA

1.इन बातों को बार बार गौर करे…सही समय,सही मित्र,सही ठिकाना,पैसे कमाने के सही साधन,पैसे खर्चा करने के सही तरीके आपके उर्जा स्रोत।2.आदमी अपने व्यवहार से स्वयं  ही अपने मन का भेद खोल देता है।3.भले लोग दूसरों के शरीर को भी अपना ही शरीर  मानते  है। Read More »