उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों पर हुए चुनाव ने समाजवादी पार्टी को 2027 के विधानसभा चुनाव से 5 महीने पहले बड़ी राहत दी है। अखिलेश यादव की सोची-समझी रणनीति और तैयारी से सपा की राह आसान हुई है।यह जीत सपा के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि भाजपा ने इन सीटों को जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कमान संभाली थी, साथ में दर्जनों मंत्री, सौ से ज्यादा विधायक और कई सांसद मैदान में थे।सपा ने भाजपा से सीखा सबक, ढाई साल पहले बनाया प्लानसपा ने इस बार अपने प्रतिद्वंद्वी भाजपा से ही सबक लिया। अखिलेश यादव ने MLC चुनाव के लिए ढाई साल पहले ही प्रत्याशी घोषित कर दिए थे।जिलों में तैयारी के लिए त्रिस्तरीय सिस्टम बनाया गया:जिला संगठन को प्रचार और वोटर बनाने की जिम्मेदारी दी गई।विधायकों, सांसदों के साथ पूर्व विधायकों-सांसदों की टीम बनाई गई।अखिलेश यादव खुद लगातार समीक्षा बैठकें करते रहे।सपा ने सिर्फ जिताऊ चेहरों पर दांव लगाया। इस जीत से सपा न सिर्फ विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष का पद बचाने में कामयाब रही, बल्कि सदन में उसके सदस्यों की संख्या भी बढ़ गई है।हर स्थिति के लिए था प्लानसपा के पूर्व एमएलसी उदयवीर सिंह के मुताबिक पार्टी ने हर स्थिति के लिए पहले से प्लान तैयार किया था। पुलिस-प्रशासन के दबाव, मतगणना में देरी और गड़बड़ी से निपटने के लिए कार्यकर्ताओं को पहले से तैयार किया गया था। जैसे वाराणसी में मतगणना में देरी होने पर 500-500 कार्यकर्ताओं को बारी-बारी मुस्तैद किया गया। इसी तैयारी का नतीजा है कि सपा अपना आंकड़ा 3 से 4 तक ले गई, और 5वीं सीट पर भी उसकी दावेदारी मजबूत है।जीत के बाद अखिलेश के हमले तेजMLC चुनाव के बाद अखिलेश यादव ने भाजपा पर हमले तेज कर दिए हैं। उन्होंने कहा - आगरा में मतदान केंद्र के अंदर मारपीट, गोरखपुर में बवाल और वाराणसी में धरना इसका सबूत है कि गुंडागर्दी, बेईमानी और धांधली भाजपा की पहचान बन गई है।उन्होंने गोरखपुर का जिक्र करते हुए कहा कि डॉ. संजयन त्रिपाठी को हराने की साजिश हुई है। इसके पीछे ‘हाता नहीं भाता’ मुख्य कारण है। गोरखपुर में पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के आवास को हाता कहा जाता है।अखिलेश ने कहा, भाजपा वोट से नहीं, खोट से जीतती है। गोरखपुर शिक्षक क्षेत्र में सपा प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी का उत्पीड़न पूरा समाज देख रहा है। आगरा में डॉ. आकाश अग्रवाल के साथ हुए बर्ताव से अग्रहरि समाज आहत है।उन्होंने कहा कि अब PDA की लड़ाई 5 फीसदी भाजपाई बनाम 95 फीसदी PDA की हो गई है, और PDA में ‘A’ का मतलब अग्रवाल-अग्रवंशी भी है।