भोपाल। मध्यप्रदेश में 42 सरकारी आईटीआई को प्राइवेट हाथों में सौंपने के फैसले पर अब बड़ा विरोध शुरू हो गया है। सरकार इस फैसले को कौशल विकास के नाम पर ला रही है, लेकिन भास्कर की पड़ताल में जो सच सामने आया है वो चौंकाने वाला है।जिन 10 आईटीआई को पहले परम फाउंडेशन को दिया गया था, वहां 4 साल में ही फीस 10,680 रुपये से बढ़कर 1.50 लाख रुपये तक पहुंच गई है। वादा 100% प्लेसमेंट का किया गया था, लेकिन 30% बच्चों को भी नौकरी नहीं मिल पाई है।केस 1 - सरदारपुर, धार :यहां आईटीआई चलाने वाली संस्था ने बच्चों से लोन लेकर फीस भरवाई। नियम के मुताबिक परम को कम छात्र संख्या वाली आईटीआई में 30% बच्चों का भी प्लेसमेंट करना था, लेकिन एक भी बच्चे का प्लेसमेंट नहीं हुआ। यहां तक कि विभाग को सौंपी गई 90-100% प्लेसमेंट की रिपोर्ट भी फर्जी निकली।केस 2 - घोड़ाडोंगरी, बैतूल :यहां आईटीआई को 45 किमी दूर शिफ्ट कर दिया गया। पहले से चल रही विंग भी बंद कर दी गई। 35 बच्चों में से सिर्फ 10 को ही इमारत में जगह मिली। फीस 30 हजार से बढ़कर 1.50 लाख हो गई। बच्चों ने बताया कि पहले गरीब परिवार के बच्चे भी पढ़ लेते थे, अब लोन लेना पड़ रहा है।क्या है अनुबंध में?सरकार ने परम फाउंडेशन के साथ करार किया है। इसके तहत -विभाग हर एक आईटीआई के लिए संस्था को 3.50 करोड़ रुपए देगा। सरकारी भवन किराए पर संस्था को दिया जाएगा। संस्था को आईटीआई में जरूरत के मुताबिक आधुनिक मशीन, असेंबली लाइन और सॉफ्ट स्किल्स की लैब तैयार करनी होगी। खासकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की आईटीआई को बेहतर बनाया जाएगा। बेटियों के लिए क्या योजना?संस्था का दावा है कि वह बालिकाओं के लिए आवासीय कौशल प्रशिक्षण चलाएगी। युवाओं को गारमेंट्स, टेक्सटाइल, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की बड़ी कंपनियों में नौकरी दिलाएगी। पहले इसका अनुबंध 15 साल के लिए था, जिसे अब 5-5 साल बढ़ाकर कुल 35 साल कर दिया गया है।