उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर मुस्लिम वोट बैंक सेंटर में आ गया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी इन दिनों यूपी में काफी एक्टिव हैं। खास बात ये है कि ओवैसी सत्ताधारी बीजेपी से ज्यादा मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी (SP) पर हमलावर हैं। रामपुर के बाद कैराना की जनसभा में दिए उनके बयान से सियासी हलचल तेज हो गई है।कैराना में ओवैसी का अखिलेश परिवार पर हमला:कैराना रैली में ओवैसी ने कहा- ‘बदायूं लोकसभा सीट से कभी मुसलमान सांसद बनता था, अब अखिलेश यादव के भाई वहां से सांसद बन गए। एक जमाना था फिरोजाबाद से मुसलमान सांसद बनता था, अब वहां से अखिलेश के परिवार के लोग सांसद बन गए।’ओवैसी ने उन मुस्लिम+यादव बाहुल्य सीटों का जिक्र किया जहां पहले मुस्लिम चेहरे जीतते थे और अब सपा परिवार का कब्जा है।आंकड़ों में मुस्लिम वोट बैंक की कहानी:2022 विधानसभा चुनाव में 34 मुस्लिम प्रत्याशी जीते, 2017 में 24 जीते थे। 2022 के सभी 34 मुस्लिम विधायक SP गठबंधन के थे।2024 लोकसभा में SP के 37 सांसदों में 4 मुस्लिम सांसद जीते। 2019 में SP के 5 में से 3 मुस्लिम सांसद थे।वोट शेयर: 2014 लोकसभा में 58% मुस्लिम वोट SP को, 2017 विधानसभा में 55%, और 2022 विधानसभा में 80% मुस्लिम वोट SP के खाते में गया।यूपी में AIMIM का अब तक का हाल:2017 विधानसभा: 38 सीटों पर लड़ी, 37 पर जमानत जब्त, कुल 2,04,142 वोट।2022 विधानसभा: 95 सीटों पर लड़ी, सिर्फ 0.49% वोट, एक भी सीट नहीं।2024 लोकसभा: पल्लवी पटेल की अपना दल कमेरावादी के साथ PDM न्याय मोर्चा बनाया, जो अखिलेश के PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) के जवाब में PDM (पिछड़ा-दलित-मुसलमान) था। 25 सीटों पर लड़े लेकिन AIMIM का एक भी कैंडिडेट नहीं था।अखिलेश को टेंशन क्यों?सियासी जानकारों के मुताबिक ओवैसी ने SP की कमजोर कड़ी पकड़ ली है। वो SP-कांग्रेस पर दबाव बना रहे हैं कि AIMIM को INDIA गठबंधन में शामिल किया जाए। अगर नहीं किया गया तो मुस्लिम वोट में सेंध लगने का डर दिखा रहे हैं।अखिलेश के सामने दोहरी चुनौती है- ओवैसी को साथ लिया तो यादव-मुस्लिम समीकरण में बिखराव का डर, नहीं लिया तो 2022 वाला 80% मुस्लिम वोट बैंक खिसक सकता है। यही वजह है कि Mission 2027 से पहले यूपी का सियासी शतरंज और दिलचस्प हो गया है।