नीट अभ्यर्थी का आरोप है कि उसे उसकी मेरिट और पसंद के हिसाब से कॉलेज नहीं दिया गया। छात्र ने दावा किया कि NEET पास करने के बाद डायरेक्टरेट ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DHS) ने काउंसलिंग कराई, जिसमें कैंडिडेट्स ने डॉक्यूमेंट्स जमा किए और मेरिट के आधार पर कॉलेज की पसंद बताई। नीट यूजी 2026 पास करने वाले एक छात्र ने काउंसलिंग और सीट अलॉटमेंट प्रक्रिया के दौरान बेईमानी और धांधली का आरोप लगाते हुए अपनी एमबीबीएस सीट छोड़ दी है। इस छात्र को मेघालय स्टेट कोटा के तहत MBBS सीट अलॉट हुई थी।जिन छात्रों के नंबर मुझसे कम थे, उन्हें नॉर्थ ईस्टर्न इंदिरा गांधी रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ एंड मेडिकल साइंसेज (NEIGRIHMS) मिला, जबकि मुझे रिम्स (RIMS), रांची अलॉट किया गया।' उसने आरोप लगाया कि पहली लिस्ट जारी होने के बाद उसे उसकी चौथी पसंद का कॉलेज मिला, जबकि उसे बेहतर पसंद वाला कॉलेज मिलने की उम्मीद थी।उसने आरोप लगाया, 'मुझे अपनी चौथी पसंद का कॉलेज मिलने पर हैरानी हुई।उसने दावा किया कि दूसरी काउंसलिंग के दौरान उसने NEIGRIHMS को अपनी पहली पसंद के तौर पर चुना, लेकिन उसे बताया गया कि कोई सीट खाली नहीं है।छात्र ने दावा करते हुए कहा, 'लिस्ट जारी होने के बाद मुझे यह जानकर हैरानी हुई कि जिन दो छात्रों के नंबर मुझसे कम थे, उन्हें RIMS इंफाल में सीट मिल गई। जबकि मुझे बताया गया था कि वहां कोई वैकेंसी नहीं है।' उसने इस प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। काउंसलिंग को लेकर निराशा जताते हुए छात्र ने कहा कि उसने अलॉट की गई सीट छोड़ने का फैसला किया क्योंकि वह अपनी मेरिट और पसंद के हिसाब से कॉलेज चाहता था।