नई दिल्ली में चल रहे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि भोपाल के मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी करने के लिए सरकार को अंतिम अनुमति दे दी गई है।सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि इस मामले में अब कोई नई कमेटी नहीं बनाई जाएगी। पहले से जो गठित कमेटी है उसी को काम करना होगा, कोर्ट ने उस कमेटी पर नाराजगी भी जताई है। वहीं, रहवासियों की तरफ से शिकायत आई है कि जो दुकानें सील की जाती हैं, वो सुबह बंद रहती हैं लेकिन शाम होते ही फिर से खुल जाती हैं। इस पर कोर्ट ने प्रभावी तरीके से कार्रवाई करने को कहा है। अभी भोपाल में 2005 के मास्टर प्लान के हिसाब से ही सब काम चल रहा है। याचिकाकर्ता ने नगर निगम की रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कई जगहों पर कार्रवाई सिर्फ कागजों पर ही हुई है। दूसरी तरफ व्यापारियों का कहना है कि कार्रवाई से उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है, जबकि रहवासियों का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में दुकानें खुलने से शोर, भीड़ और ट्रैफिक की समस्या बढ़ रही है।                 5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने आवासीय क्षेत्रों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी।करीब 15 दिन तक लगातार नोटिस जारी किए गए। नगर निगम के मुताबिक कुल 62,500 प्रतिष्ठानों की लिस्ट में से 8,084 को नोटिस दिए गए हैं। इसके बाद 3 दिन तक चले अभियान में 190 प्रतिष्ठानों को बंद भी किया गया था।हालांकि, सीलिंग कार्रवाई का विरोध करते हुए व्यापारी जब सड़क पर उतर आए, तो इसके बाद निगम ने कार्रवाई को रोक दिया। पिछले 22 दिनों से सीलिंग की कोई कार्रवाई नहीं हुई है।